हर सुबह में मुझे दिखती है, एक नयी ताजगी, एक नयी ज़िन्दगी, एक नयी आशा, एक नया विश्वास ... आखिर सुबह में ऐसा क्या है ? शायाद सुबह में होता है बचपन ... वो बचपन जो होता है मासूम, वो बचपन जो होता है आनंदमयी, वो बचपन जिसमे छोटी छोटी चीजो में मिलती है बड़ी बड़ी खुशियाँ !
इसलिए अगर जिंदगी में ताजगी, आशा और आनंद लेना हो तो अपने के अन्दर बचपने को मौका दो ! ये बचपना हमे ज़िन्दगी कि छोटी चीजो में बड़ा आनंद लेना सिखा देगा !
Sunday, May 16, 2010
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